​जमुई का लाल चमका: कर्मचारी से सीधे SDM बने सचिन, नक्सल प्रभावित गांव में जश्न

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Success Story.. संघर्ष की महागाथा: सीमित संसाधनों में रची बड़ी कामयाबी

जमुई (खैरा)। प्रतिभा और पक्के इरादे किसी परिचय या अनुकूल परिस्थितियों के मोहताज नहीं होते, इसे सच कर दिखाया है जमुई जिले के खैरा प्रखंड के एक साधारण परिवार के बेटे सचिन कुमार ने। सचिन ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 104वां रैंक हासिल कर अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) का पद पाया है।

​कभी नक्सलवाद के खौफ और साये में रहने वाले खैरा प्रखंड के देवलाटाड़ (गरही) गांव में आज डर नहीं, बल्कि गर्व और जश्न का माहौल है। गांव निवासी सुरेश दास दबगर के पुत्र सचिन कुमार की इस ऐतिहासिक सफलता ने पूरे जिले को गौरवान्वित कर दिया है।

ग्रुप-डी की नौकरी से शुरू हुआ सफर, नहीं थमा प्रशासनिक सेवा का सपना

​सचिन की यह सफलता उन हजारों युवाओं के लिए एक जीती-जागती प्रेरणा है जो वर्किंग प्रोफेशनल हैं। सचिन ने अपनी नौकरी के साथ-साथ पढ़ाई के कड़े तालमेल को कभी बिगड़ने नहीं दिया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भारतीय रेलवे में ग्रुप-डी कर्मचारी के रूप में की थी। इसके बाद उनका चयन राजस्व कर्मचारी के पद पर हुआ, जहां उन्होंने पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।

​”नौकरी की व्यस्तता के बीच भी सचिन का लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट था—बिहार प्रशासनिक सेवा। लगातार मेहनत, कड़े अनुशासन और विपरीत परिस्थितियों से लड़ते हुए आखिरकार उन्होंने इतिहास रच दिया।”

खास बातें:

  • संघर्ष से सफलता: रेलवे ग्रुप-डी और राजस्व कर्मचारी रहते हुए हासिल की 70वीं BPSC में 104वीं रैंक।
  • बदली तस्वीर: कभी नक्सलवाद के साये में रहे खैरा के देवलाटाड़ गांव का नाम किया रोशन।
  • भव्य स्वागत: सैकड़ों वाहनों के काफिले के साथ पैतृक गांव पहुंचे सचिन, ग्रामीणों ने पलक-पावड़े बिछाए।

रविवार की सुबह: जमुई की सड़कों पर दिखा ऐतिहासिक नजारा

​सफलता की आधिकारिक घोषणा के बाद रविवार सुबह जैसे ही सचिन कुमार अपने पैतृक गांव पहुंचे, पूरा इलाका ‘सचिन कुमार जिंदाबाद’ के नारों से गूंज उठा। उनके स्वागत को लेकर ग्रामीणों और स्थानीय युवाओं में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया।

  • खैरा से गांव तक स्वागत द्वार: खैरा मुख्य बाजार से लेकर देवलाटाड़ गांव तक जगह-जगह तोरण द्वार बनाए गए थे।
  • सैकड़ों वाहनों का काफिला: सचिन के स्वागत में सैकड़ों गाड़ियों और बाइकों का काफिला साथ चल रहा था, जो जमुई के इतिहास में किसी छात्र की सफलता पर ऐसा पहला नजारा था।
  • फूल-मालाओं से लाद दिया: ग्रामीणों, सगे-संबंधियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सचिन को फूल-मालाओं और मिठाई खिलाकर बधाई दी।

आने वाली पीढ़ियों के लिए बने मिसाल

​ग्रामीणों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि सचिन ने यह साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य ऊंचा हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो संसाधनों की कमी कभी आड़े नहीं आती। उन्होंने न केवल अपने परिवार और समाज का सिर ऊंचा किया है, बल्कि जमुई के इस सुदूर और पिछड़े क्षेत्र के बच्चों को एक नया रास्ता दिखाया है। उनकी यह सफलता आने वाली कई पीढ़ियों के लिए संघर्ष और कामयाबी की सबसे बड़ी मिसाल रहेगी।

जमुई से प्रशांत किशोर

 

ANE Live
Author: ANE Live

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